Overthinking se kaise bache

Overthinking se bachne ke upay। ओवेरथिंकिंग से बचने के उपाय 

हम सभी को पता है कि आवश्यकता से अधिक सोचना हमारे दिल और दिमाग़ दोनों के लिए अच्छा नहीं होता ये जानते हुए भी हम कभी- कभी अपने विचारों पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं जिससे उसका नुक़सान हमारे स्वास्थ्य पर बहुत अधिक पड़ता है।



ओवेरथिंकिंग एक ऐसी बुरी आदत है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत बुरी है। समय रहते हैं अगर हमने इसको नियंत्रित नहीं किया तो ये शरीर में बड़ी बड़ी बीमारियों को पैदा कर सकती है।



शुरू में जब हम किसी बात, जो कि बीत चुकी है या फिर होने वाली है,  पर विचार करते हैं तो हमें मालूम नहीं चलता कि धीरे धीरे कब ये विचार बिना किसी बात के हमारे दिमाग़ में ज़रूरत से अधिक चलने लगते हैं और एक समय के  बाद हम over thinking के शिकार हो जाते हैं।



आज की इस लेख में हम ये जानेंगे कि ओवर थिंकिंग से कैसे छुटकारा पाएँ (over thinking se kaise chutkara payen).






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Overthinking se kya hota hai। ओवेरथिंकिंग से क्या होता है-

  • इससे तनाव अधिक बढ़ जाता है।
  • हमेशा क्रोध आता है।
  • बार बार एक ही नकारात्मक विचार दिमाग़ में चलता रहता है।
  • ज़्यादा सोचते रहने से दिन प्रतिदिन के कार्यों में बाधा आती है।
  • किसी के ऊपर ट्रस्ट नहीं रहता है  और अपने संबंधो को लेके नकारात्मक हो जाना।
  • मानसिक कमज़ोरी का शिकार हो जाना।
  • याद रखने की क्षमता कम होना।

इस प्रकार से अगर overthinking को रोका नहीं गया तो आगे चलके इसके वजह से हमें हृदय रोग जैसी गम्भीर समस्याएँ भी हो सकती हैं इसलिए समय रहते हैं इस आदत को छोड़ देना ही अच्छा होता है



क्या आपने यह पढ़ा-







Overthinking se hone wali bimariya। ओवेरथिंकिंग से होने वाली बीमारियाँ-

ओवेरथिंकिंग करने से आपको घबराहट और कमजोरी मालूम होने लगती है, साँस लेने में तकलीफ़ या साँस का छोटा हो जाना और पाचन का ख़राब रहना जैसी बीमारियाँ आ सकती हैं।




jyada sochne se dimag pr kya asar padta hai। ज़्यादा सोचने से दिमाग़ पर क्या असर पड़ता है-

हमारा दिमाग़ न्यूरॉन नाम के कोशिकाओं से बना होता है। यह एक यंत्र के समान कार्य करता है। जब भी हमारा दिमाग़ किसी बात को सोचता है तो दिमाग़ की कोशिकाएं एक- दूसरे से connect हो के मेमरी को process करती हैं जिससे हम किसी भी  बात को याद कर पाते हैं या कोई कल्पना कर पाते हैं।



over thinking करने से दिमाग़ को आवश्यकता से अधिक कार्य करना पड़ता है जिससे एक समय के बाद कोशिकाओं की शक्ति कमजोर होने लगती है  जिससे हमरी एकाग्रता समाप्त हो जाती है और हमारे अंदर कि सकारात्मक सोच समाप्त होने लगती है और हम चीज़ों को भूलने लगते हैं।



Jyada sochna band kaise kare। ज़्यादा सोचना कैसे बंद करें-

इसके बारे में हम आपको नीचे बता रहें हैं-


अकेले में ना रहें। ज़्यादातर अपने परिवार या मित्रों के साथ समय व्यतीत करें

जब आप अपने शुभचिंतकों या मित्रों के साथ में रहते हैं तो आपका दिमाग़ बात-चीत और हँसी मज़ाक में लगा रहता है जिस से ओवेरथिंकिंग के लिए दिमाग़ को मौक़ा ही नही मिलता।



अपना पसंदीदा कार्य करें-

अगर आपकी कोई hobby है या कोई ऐसा कार्य है जिसको करना पसंद करते हैं तो ख़ाली समय में उसे करें जिससे की आपका दिमाग़ busy रहेगा और over thinking नहीं करेगा।



मेडिटेशन या ध्यान की प्रैक्टिस करें-

ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे कि हम ख़ुद के बारे में अवेयर होते हैं यदि हम प्रतिदिन ध्यान की प्रैक्टिस करें तो हमें अपने विचारों को समझने में आसानी होगी और उन पर नियंत्रण करना आसान हो जाता है।


प्रतिदिन 5-10 मिनट ध्यान करने से over thinking की समस्या को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है यह हमारे शरीर और मन दोनों के लिए बहुत ही अच्छा होता है।



किसी कार्य को एक दम से पर्फ़ेक्ट करने की कोशिश ना करें-

बहुत से लोगों में अपने काम को 100% पर्फेक्ट करने की चाहत होती है जिसकी वजह से वो काम करने से पहले ही काफ़ी दबाव में जाते हैं और उनकी कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है और वो  over thinking के जाल में फँस जाते हैं।


इसलिए इससे बचने के लिए किसी कार्य को 100 प्रतिशत perfect करने के दबाव में न रहें गलतियां सब से होती है।हमेशा गलतियों को स्वीकार करना करना सीखें और अपने कार्य को करते रहे हैं समय के साथ- साथ बहुत चीज़ें हमको आती है तो पर्फेक्शन भी एक समय में अपने आप जाएगा।



Overthinking ka ilaaj kya hai। ओवेरथिंकिंग का इलाज क्या है-

अगर देखा जाए तो over thinking एक मानसिक बीमारी है इसको सही करने के लिए हमें ख़ुद को ज़्यादा से ज़्यादा busy रखना पड़ता है और साथ ही साथ हमें अपने परिवार और दोस्तों के बीच में रहना अच्छा होता है।


अगर इसके बाद भी आप over thinking करते हैं तो आपको किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लेना अच्छा रहेगा साथ ही साथ यदि आप प्रतिदिन मेडिटेशन यार ध्यान की प्रैक्टिस करते हैं तो भी आपको काफ़ी राहत मिलती है।



Overthinking ke lakshan। ओवर थिंकिंग के लक्षण-

इसका सबसे बड़ा लक्षण यह होता है कि आप अपने वर्तमान में नहीं पाते हैं। आपका ज़्यादातर समय आपका दिमाग़ आपके past या फिर भविष्य की बातों में उलझा रहता है। कभी- कभी आपको पता भी नहीं चलता कि आप कब और कौन से विचारों से घिर चुके हैं, उसमें आपका काफ़ी अधिक समय चला जाता है और आपका मन अपने कार्य में नहीं लगता।



jyada tension lene se kya hota hai।ज़्यादा टेन्शन लेने से क्या होता है-

ज़्यादा टेन्शन लेने से हमारा दिन प्रतिदिन का सम्बंध ख़राब होता है। हम हमेशा दुखी महसूस करते हैं हमें कोई चीज़ महसूस नहीं होती है। लोग हमसे दूरी बनाने लगते हैं और हम ज़्यादातर अपना समय अकेलेपन में गुज़ारने के लिए मजबूर हो जाते हैं जिससे हैं हमारी सामाजिक जीवन काफ़ी प्रभावित होता है।



अंत में-

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