रियल स्टोरी पर आधारित Bollywood की 5 ऐसी मोटिवेशनल movies जो आपका जीवन बदल सकती है

5 मोटिवेशनल movies जो आपका जीवन बदल सकती है।

movies हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, हम में से बहुत से लोग रेगुलर movies देखने वालों में से भी हैं।मूवीज़ से हमें अपने समाज के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कभी - कभी हमें अपने असल ज़िंदगी की समस्याओं का समाधान movies में मिल जाता है।


Bollywood की 5 ऐसी मोटिवेशनल movies जो आपका जीवन बदल सकती है


एक कहावत है की "आप जो देखते है और सोचते हैं आपके जीवन में उसी के अनुरूप बदलाव आने लगते हैं " तो इस प्रकार अगर आप अच्छी movies देखेंगे तो आपको उस से अच्छा नॉलेज मिलेगा, आप motivate होंगे और जिन सपनों को आप हार मानकर छोड़ बैठें हैं, उन्हें पाने के लिए एक बार फिर उठ खड़े होंगे।

तो आज के इस लेख में हम आपके लिए लाएँ है 5 ऐसी रियल स्टोरी पर आधारित दमदार मूवीज़ जो आपके life को बदल कर रख देगी और आपको बुरे से बुरे परिस्थितयों में लड़ना सीखा देंगी।

हम आपको कोई भी ऐसी रेगुलर मूवी नहीं बताएँगे जिसको आप लोगों ने पहले से ही देख रखा हो जैसे: taare zameen pe, Guru,  A Wednesday, zindagi na milegi dobara, bhaag milkha bhaag etc.


इन मूवीज़ को आप किसी भी catagory में रख सकते हैं जैसे Best motivational bollywood movies, inspirational bollywood movies, motivational bollywood movies, inspiring bollywood movies etc.



तो आइए देखते हैं :


1. Iqbal (इक़बाल) : 

अगर मोटिवेशनल मूवीज़ की बात करें तो iqbal को इंडिया की बेस्ट मोटिवेशनल मूवी का अवार्ड मिलना चाहिए। इसमें एक ऐसे लड़के की कहानी है जिसका जन्म बहुत ही गरीब किसान परिवार में होता है और वह  जन्म से ही ना कुछ सुन पाता है और ना ही बोल पाता है, उसका सपना टीम India की तरफ़ से international cricket खेलने का रहता है।


इस में आप देखेंगे की कैसे वह लड़का भैंसों के झुंड के पीछे छुपकर एक cricket ट्रेनिंग सेंटर में, क्रिकेट सीखा रहे कोच को देखकर bowling करना सीखता है।

फिर इस लड़के की मुलाक़ात एक ऐसे शख़्स से होती है जो एक failed cricketer (नसीरूद्दीन शाह) होता है जो बाद में अपनी drinking की आदत छोड़कर उस लड़के को indian cricket team में शामिल करवाने का निश्चय करता है और उस लड़के की सफलता में अपनी सफलता ढूँढने की कोशिश करता है।

यह मूवी हमें सिखाती है कि चाहे जितनी भी समस्याएँ आएँ हमें अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।


2. Manjhi(माँझी):

इस मूवी में बिहार में सन 1929 में जन्मे दशरथ माँझी नाम के एक ग़रीब मज़दूर की कहानी है। मूवी में दशरथ माँझी का किरदार निभाया है नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी ने जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है। माँझी को माउंटेन मैन के नाम से भी जाना जाता है।

माँझी ने 22 वर्षों तक छेनी हथौड़ी की मदद से लगातार मेहनत करके 360 फ़ुट लम्बी, 30 फ़ुट चौड़ी और 25 फ़ुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली जिस से अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी 55 km से 15km मात्र रह गयी।

दशरथ माँझी बहुत पिछड़े इलाक़े से आते थे और आदिवासी जाति के थे। वे जिस गाँव में रहते थे वह से पास के क़स्बे में जाने के लिए पूरा पहाड़ (गहलोर पर्वत) पार करना पड़ता था।उनके गाँव में उन दिनो ना बिजली थी ना पानी। 

ऐसे में छोटी से छोटी ज़रूरतों के लिए भी उस पहाड़ को पार करके जाना पड़ता था। उन्होंने फाल्गुनी देवी से शादी की थी जिनसे वो बहुत प्रेम करते थे। 

दशरथ माँझी को गहलोर पहाड़ को काटने का जुनून तब सवार हुआ जब उनकी पत्नी उनके लिए खाना लेकर पहाड़ के दूसरी तरफ़ से आ रहीं थीं और पैर फिसलने से पहाड़ के दर्रे में गिरकर उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी पत्नी की मृत्यु दवाइयों के अभाव में हो गयी क्यूँकि बाज़ार दूर था।

समय पर दवा ना मिल पायी और यह बात उनके मन में घर कर गयी। इसके बाद दशरथ माँझी ने संकल्प लिया कि वो अकेले के दम पर पहाड़ को काटेगा और उसके बीचोंबीच रास्ता निकालेगा।

3. Guru (गुरु) :

यह फ़िल्म भारत के सबसे बड़े business टायकून "धीरू भाई अम्बानी " पर आधारित है। इसमें धीरू भाई का किरदार अभिषेक बच्चन ने निभाया है।

फ़िल्म की शुरुआत नॉर्थ गुजरात के "Idar " गाँव से होती है जहां एक Gurukant desai नाम का लड़का एक दिन बहुत बड़ा आदमी बन ने का सपना देखता है। उसके पिता कांतिलाल उसको इतने बड़े सपने देखने से मना करते है और कहते हैं की ऐसे सपने ना देखो जो कभी पूरे ही ना हो पाएँ।

गुरु Turkey जाने का निर्णय करता है और वहाँ जाकर एक मसाले के व्यापार में अपना हाथ आज़माता है। कुछ दिन वहाँ रहने के बाद गुरु अपने देश में लौट आता है और अपना खुद का business करने के बारे में सोचता है।

गुरु इंडिया में business करने के लिए सुजाता से शादी कर लेता है क्यूँकि शादी में मिले दहेज से वो अपना व्यापार शुरू कर सकता था। इसके बाद गुरु मुंबई चला जाता है और कपड़े का व्यवसाय शुरू करता है।

धीरे - धीरे उसका business बढ़ने लगता है और वो अपनी कपड़ा बनाने वाली खुद की फ़ैक्टरी shakti corporation खोल लेता है। फिर आगे guru अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए ग़ैरक़ानूनी रूप से फ़ैक्टरी की मशीन ख़रीदने लगता है जिस से वो ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से माल तैयार करवाता है।

इसी तरह से आगे movie में बहुत सारे उतार चढ़ाव आते हैं आगे मूवी में आप देख कर आप जान सकते हैं ।


4. Neerja (नीरजा) :

यह movie मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित फ़्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट पर आधारित है। नीरजा भनोट का किरदार सोनम कपूर द्वारा निभाया गया है। 7 सितम्बर 1963 में जन्मी नीरजा भनोट ने कुछ दिन मॉडलिंग में भी रहीं थीं।सन 1985 में इनकी अरेंज मैरिज हुयी।

दहेज के माँग को लेकर उनका शादी का अनुभव अच्छा नहीं रहा और वो अपने मायके लौट आयीं। बाद में उन्होंने Pan M में फ़्लाइट अट्टेंडेंट के लिए अप्लाई किया और उनका सिलेक्शन हो गया।

Pan M फ़्लाइट को जिसमें नीरजा duty कर रहीं थी , को 4 आतंकियों ने हाइजैक कर लिया। आतंकियों ने नीरजा से सभी यात्रियों का पास्पोर्ट चेक करके अमेरिकी यात्रियों की संख्या बताने को कहा। नीरजा ने 41 अमेरिकी नागरिकों के passport छुपा दिए।

17 घंटे तक विमान हाइजैक रहा, आतंकियों ने विमान में आग लगा दी नीरजा ने आपातकालीन दरवाज़ा खोलकर सभी यात्रियों को बाहर निकाला, अगर वो चाहतीं तो सबसे पहले जा सकतीं थीं।

मूवी के अंत में नीरजा तीन बच्चों को आतंकियों के गोली से बचने के लिए सामने आ जाती हैं और गोली लगने से मात्र 22 वर्ष की age में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।



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5. Black (ब्लैक): 

यह मूवी एक ऐसी लड़की पर आधारित है जो बोलने और सुनने में असमर्थ है। इसमें मुख्य किरदार में रानी मुखर्जी है जिन्होंने उस लड़की का किरदार निभाया है और अमिताभ बच्चन जी है जो लड़की के टीचर के रूप में किरदार निभाते हैं, जो बाद में अल्ज़ाइमर नामक दिमाग़ी बीमारी से ग्रसित हो जाता है।

मुख्य रूप से यह मूवी हेलेन केलर के जीवन पर बनायी गयी है जो blind और mute होने के बाद भी अपनी इच्छा शक्ति के दम पर पूरे विश्व अपने कला और अकडेमिक्स के लिए जानी जाती हैं।

फ़िल्म की शुरुआत होती है एक मीशेल मकनेल्ली नाम की लड़की से जो mute और deaf है और अपने टीचर देबराज सहाय से मिलने के लिए हॉस्पिटल जाती है। देबराज सहाय अलज़ाइमर से पीड़ित हैं और उनको अपना past तक अब याद नहीं।

मीशेल एक ऐसी लड़की है जिसने अपनी 2 वर्ष के अवस्था में एक बीमारी की वजह से बोल और सुन नहीं सकती जिसकी वजह से उसका चिचिड़ापन बढ़ता ही जाता है। वह अपने आप को एक बहुत ही घने अंधकार में पाती है जहां उसे ना ही कुछ सुनायी पड़ता है और ना ही कुछ दिखाई।

उसके parents उसके इस व्यवहार से बहुत निराश होने लगते हैं, फिर एक दिन मीशेल की मुलाक़ात देबराज से होती है जो एक नशे का आदी टीचर रहता है और mute और deaf को पढ़ाता है।

देबराज एक सनकी प्रवित्ति का व्यक्ति रहता है जो मीशेल को बोलने और पढ़ाने के लिए ठान लेता है और उसकी जीत में जीत और उसकी हार में हार मान लेता है।

समय के साथ - साथ मीशेल को बोलना और पढ़ना आने लगता है और देबराज के मदद से वो अब एक college में डिग्री के लिए अड्मिशन भी ले लेती है।

आगे की कहानी आप मूवी देखकर समझ जाएँगे क्यूँकि अगर पूरी स्टोरी हम आपको यहाँ बता देंगे तो आप movie देखने में पूरा interest नहीं पाएँगे।


conclusion :

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2 टिप्पणियाँ

  1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका। बेकार सी फिल्मे देखने से अच्छा है हम कुछ जीवनोपयोगी देखें।

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद आपका। बेकार सी फिल्मे देखने से अच्छा है हम कुछ जीवनोपयोगी देखें।

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